सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के संबंध में प्रायः पूछे जानेवाले प्रश्न - Faq's
उद्योग प्रायः पूछे जानेवाले प्रश्न


सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के संबंध में प्रायः पूछे जानेवाले प्रश्न
सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के संबंध में प्रायः पूछे जानेवाले प्रश्न
सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक के वर्तमान विनियमों तथा सरकार की नीति संरचना से बैंक के प्रतिबद्धता कोड किस प्रकार भिन्न है? बैंक के कोड का आशय वर्तमान विनियमों को बदलना नहीं है परन्तु उसके पूरक के रूप में है। विनियम अपने आप में सभी को गुणवत्तापूर्ण सेवा सुनिश्चित नहीं करते है। यह कोड बैंकरों द्वारा पारदर्शी, त्वरित तथा सक्षम बैंकिंग सेवाओं की सरल पहुंच प्रदान करने के लिए एक सकारात्मक तथा स्वैच्छिक प्रतिबद्धता अपनाकर इसकी प्राप्ति करना चाहता है। बैंक सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप अपने उत्पाद एवं सेवाएँ प्रदान करने के लिए तथा उनकी वित्तीय समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्ण विचार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस कोड के कारण बैंक सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को निम्नलिखित सेवाएं निःशुल्क प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैः
- सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए बैंक की प्रतिबद्धता कोड की प्रति जोकि उनको प्राप्त अधिकारों की सूची है।
- सभी विधिक एवं विनियामक आवश्यकताओं की जांचसूची सहित ऋण के लिए सरल मानकीकृत तथा समझने के लिए आसान आवेदन फार्म।
बैंकों को निम्नलिखित जानकारी भी सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को उपलब्ध करनी हैः:
- ए. लागू ब्याज दरें, तथा शुल्क/ प्रभार, यदि कोई है तो, तथा सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के हितों को प्रभावित करनेवाला कोई अन्य मामला, ताकि अन्य बैंकों के साथ सार्थक तुलना की जा सके है तथा सुविज्ञ निर्णय लिया जा सके .
- सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के ऋण आवेदन, संवितरण, सेवाओं इत्यादि के लिए निर्धारित समय सीमा.
- संपार्श्विक प्रतिभूति के बिना ऋण की उपलब्धता.
- ऋण पात्रता निर्धारण तथा उसके बाद के संवितरण के मानदण्ड.
- आप जब वित्तीय कठिनाई से गुजर रहे है तब सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों का क्या दायित्व बनता है तथा आपका बैंक आपकी सहायता कैसे कर सकता है
- रुग्ण सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों का पोषण एवं ऋण पुनर्संरचना.
- सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए प्रतिबद्ध सेवाएं .
- सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों की शिकायतों के निपटान की आंतरिक कार्यविधि.
- देयताओं की वसूली, चेक संग्रहण , क्षतिपूर्ति, परिवाद निवारण इत्यादि
सभी बैंकों ने भारतीय बैंक संघ द्वारा तैयार किए गए आदर्श परिवाद निवारण नीति को अपनाया है। सभी बैंकों के पास निर्धारित समय सीमा के अंदर शिकायतों के निपटान के लिए अपना आंतरिक परिवाद निवारण कार्यप्रणाली है जो कि बाह्य परिवाद निवारण प्रणाली जैसे कि बैंकिंग लोकपास योजना के समान है। कोड में यह भी बताया गया है कि ग्राहक यदि बैंक के उत्तर से संतुष्ट नहीं है तो उन्हें शिकायत को उससे उच्च अधिकारी के पास ले जाने से हतोत्साहित नहीं करना चाहिए तथा बैंकिंग लोकपाल के पास उक्त मामले को ले जाने के लिए उनकी सहायता करनी चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक के ग्राहक सेवा विभाग द्वारा व्यक्तिगत शिकायतों का निपटान भी किया जाता है तथा यदि शिकायतें प्रणालीगत मुद्दों से जुड़ी हुई हों तो बीसीएसबीआई बैंकों प्रणालीगत गलतियों को सुधारने के लिए बैंकों के साथ अनुवर्ती कार्रवाई करता है।
इस कोड के प्रावधानों के अनुपालन के लिए बैंकों ने कई सकारात्मक उपाय आरंभ किए हैं। है। सभी बैंक अब बाकायदा अपने सभी ग्राहकों को कोड की प्रतियां वितरित करते है। चूंकि यह कोड, एक प्रकार से व्यक्ति तथा उसके बैंक के बीच के अधिकारों की सूची है, बैंक को व्यक्तिगत ग्राहक की सशक्तिकरण के लिए उसे स्वयं भेजना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा बैंकों ने चेक संग्रहण , परिवाद निवारण, प्रतिभूति की पुन: प्राप्ति तथा क्षतिपूर्ति की आदर्श नीति को अपनाया है जो जनता की जानकारी के लिए उपलब्ध है। प्रभार, शुल्क एवं ब्याज दर की जानकारी संबंधी पारदर्शिता अब वास्तव में प्रकट है तथा सभी बैंकों की शुल्क अनुसूची जनता की जानकारी के लिए उपलब्ध है। यह कुछ सकारात्मक विशेषताएं है। बीसीएसबीआई बैंकों के साथ निरंतर संवाद कर रहा है जिससे कि इस कोड का अनुपालन उसकी पूर्णता में हो सके।
Last Updated On : Wednesday, 16-10-2024

ब्याज दर
2.70% प्रति वर्ष.
से प्रभावी>3.00% प्रति वर्ष.
10 करोड़ रुपए व अधिक, 15.10.2022 से प्रभावी
2.70% प्रति वर्ष.
रु 10 करोड़ से कम शेष राशि
3.00% प्रति वर्ष.
रु 10 करोड़ और अधिक शेष राशि